दोस्त की बहन रश्मि की रेशमी चूत 1

By | May 13, 2021

Dost ki behan rashmi ki reshmi chut-1

मेरा नाम अनिल है, आयु तेईस साल और कद पांच फ़ीट सात इंच है।

मेरा रंग गोरा है, मैं कुँवारा हूँ और एक टीचर हूँ।

मैं आप लोगों के लिए अपनी एक सच्ची कहानी लेकर हाज़िर हूँ।

दोस्तो, मैं कुँवारा हूँ और मेरी एक गर्ल फ्रेंड है, लेकिन उसके साथ मिल पाना थोड़ा मुश्किल होता है इसलिए यहाँ-वहाँ चूत की तलाश में रहता हूँ।

हालाकि जब भी मौका मिलता है, मैं अपनी गर्ल फ्रेंड को चोद लेता हूँ।

काफी दिनों से मैं उससे नहीं मिला था इसलिए मैं चूत के जुगाड़ में घूम रहा था। रास्ते में कई सेक्सी खूबसूरत लड़कियों को देख कर ही मन को तसल्ली दे रहा था।

मेरा एक दोस्त है जिसका नाम प्रशांत है। वह मेरे साथ ही पढ़ता था, हम काफी वक़्त से अच्छे दोस्त थे।

मैं अक्सर उसके यहाँ आता-जाता रहता था। एक दिन संडे को मैं प्रशांत के यहाँ गया, वहाँ थोड़ी देर बैठ कर उससे बातें करता रहा।

मैंने उसको कहा, अरे यार कब से बैठा हूँ, पानी तो पिला चाय तो तू पिलाने से रहा।

वह बोला, नहीं यार! अभी पिलाता हूँ। उसने आवाज़ दी, रश्मि दीदी पानी दीजिए, चाय भी बनाइए।

मैंने कहा ये रश्मि दीदी कौन है? उसने बताया की ये उसकी बुआ की लड़की है, शादी होने के दो साल बाद उनके पति की मृत्यु हो गई थी।

मैंने कहा, ओह!

तभी मेरी आँखें खुली की खुली रह गयीं। सामने से एक चौबीस-पच्चीस साल की लड़की आई, भरे बदन वाली और चुस्त सलवार-कुरता पहने।

उसने झुक कर जब ट्रे सामने की तो मैं उसके चेहरे को देखता रह गया। गोरे गाल, गुलाबी होंठ, बड़ी-बड़ी आँखें और कसा हुआ बदन।

फिर थोड़ा नीचे को देखा, जब उसके दूध का उभार टाइट कुरती में दिखा तो लगा की सेक्स की देवी हो। वह नज़ारा तो मेरी आँखो से हट ही नहीं रहा था।

वह चली गई, मैं प्रशांत से बातें करने लगा लेकिन मुझे बार-बार रश्मि का चेहरा दिख रहा था।

मैंने सोचा, यार अनिल ये तो कमाल की लड़की है। ये अगर मिल जाए तो मज़ा आ जाए।

जैसे ही मैं घर आया मैंने बाथरूम में जा कर मूठ मारी। फिर मैं योजना बनाने लगा की कैसे जुगाड़ हो?

बातों-बातों में ये पता चला कि वह दो हफ्तों के लिए रहने आई है।

मेरे पास वक़्त कम था, सारा दिन उसके बारे में सोचते-सोचते गुजर गया, रात में मैंने फिर से मूठ मारी।

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, बस लग रहा था कि रश्मि मिल जाए।

उसको पाने के लिए मैं बिल्कुल बेताब था, उस रात मैंने तीन बार मूठ मारी। रश्मि के लिए हर बार आग बढ़ती जा रही थी।

मैं सुबह देर से जागा, तुरंत तैयार होकर प्रशांत के यहाँ पहुँच गया।

मैं जानता था कि वह दफ्तर (ऑफिस) गया होगा। दरवाज़ा खटखाटने पर रश्मि ने दरवाज़ा खोला।

मेरे मुँह से निकल गया कि प्रशांत चला गया क्या? रश्मि ने कहा, हाँ वह चला गया।

उसने कहा, आइए बैठिये। मैं चाय बनाती हूँ। मैं अंदर जा कर बैठ गया वहाँ प्रशांत की मम्मी से बात करने लगा।

वह कल की तरह चाय लायी और झुक कर मुझे दी। तब मैंने उसके जिस्म का पूरा जायजा लिया, वह किसी तरह से विधवा या शादीशुदा नहीं लग रही थी।

मेरे ऊपर तो कयामत तब बरसी जब वह मुड़ कर जा रही थी, उसके कूल्हों के बीच में सूट फसा हुआ था जिससे उसकी गांड का आकार जबरदस्त तरीके से दिख रहा था।

जब वह चल रही थी तब मटकती हुई गांड देख कर मैं तो उसको पाने के लिए तड़प उठा।

मैंने सोचा कि ये तो कयामत है, कुछ भी हो मैं इसको चोद के रहूँगा। मैंने प्रशांत के घर की निगरानी शुरु की तो पाया कि वह रोज सुबह मंदिर जाती है।

मैंने उसको मंदिर में ही मिलने की योजना बनाई, मैं पहले से मंदिर में जा कर उसका इंतजार करने लगा।

जब वह नारंगी (ऑरेंज) रंग के सूट में आई तो मैं देखता रह गया। जब वह जाने लगी तो मैंने उसको कहा, रश्मि! उसने मुझे देखा और कहा, अरे! आप मंदिर आते हो?

मैंने कहा, हाँ मंदिर भी आता हूँ, देवताओं को मानता हूँ, देवियों को देखता हूँ।

वह हंस कर बोली, बहुत बढ़िया। मैंने कहा, आप मेरे घर आइए ना कल शाम को मैं इंतज़ार करूँगा।

उसने कहा, देखो टाइम मिलेगा तो ज़रूर आऊँगी।

मैं घर जा कर शाम को उसका इंतज़ार करने लगा, पर वह नहीं आई। बहुत उदासी हुई, मेरा मन दिन भर बच्चों को पढ़ाने की जगह उसमें लगा रहा।

मुझे बहुत बुरा लगा। मैं प्रशांत के घर से सिर्फ़ सात घर दूर ही रहता था, ऐसे में मैं और ज्यादा परेशान था। लगातार दो दिन तक उसका इंतज़ार किया पर वह नहीं आई।

दूसरे दिन सुबह जब मैं उसके घर पहुंचा तो वहाँ ताला लगा देखकर हैरान रह गया। मैंने प्रशांत को कॉल लगाया, उसका मोबाइल बंद था।

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मैं घर आया, दिन भर घर में ही रहा। कहीं पढ़ाने भी नहीं गया। मैं अकेला रहता हूँ इसलिए सब कुछ बहुत बुरा लग रहा था।

दोपहर में मैं सोता रहा, चार बजे करीब मैंने चाय बनाई।

जैसे ही चाय पीना शुरु किया दरवाज़े की घंटी बजी, मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने रश्मि सफेद कसा हुआ सलवार-कमीज़ पहने खड़ी थी।

मैं हाथ में कप लिए था। वह बोली, अरे वाह! मुझे दरवाज़े से ही चाय पिला कर भेजोगे क्या?

मैंने कहा, आइए बैठिये। मैं बहुत खुश हो गया। मैंने कहा, आप दो मिनट बैठो, मैं आया।

मैंने जा कर चाय बनाई, उसको दी और कहा कि इतने दिन बाद आयीं आप, मैं उस दिन आपका इंतज़ार करता रहा।

वह बोली, क्यों? मैंने कहा, आपको बुलाया था इसलिए मैं तो जिंदगी भर इंतज़ार करता।

वह एकटक मुझे देखने लगी। मैंने मौका जान कर उसको बोल दिया, आप बहुत ही खूबसूरत हो।

वह बोली, धन्यवाद। मैंने ना जाने क्या सोच के बोलना शुरु किया और पता नहीं कहां से मेरे अंदर इतनी ताक़त आ गई।

मैंने कह दिया, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो। उस दिन से मैं दिन-रात आपके बारे में सोचता रहता हूँ। मैं लगातार बोले जा रहा था, पता नहीं क्या-क्या बोल रहा था?

वह मुझे देखे जा रही थी। बीच में ही मुझे रोक कर वह बोली, ये बकवास करने के लिए मुझे बुलाया था?

घर में अकेली बोर हो रही थी, सोचा तुम्हारे पास आकर बातें करूँगीं, मैं जा रही हूँ। वह उठ कर चली गई। मैं रोक भी नहीं पाया।

रात में करीब साढ़े-ग्यारह बजे मेरे मोबाइल में घंटी बजी, देखा प्रशांत का कॉल था। मैं डर गया, कहीं रश्मि ने जा कर उसको बता तो नहीं दिया? मैंने फोन नहीं उठाया।

दोबारा घंटी आई, जब तीसरी बार घंटी आई तो मैंने कॉल रिसीव किया, हैलो बोला, वहाँ से प्रशांत की जगह रश्मि बोल रही थी।

वह बोली, सॉरी, मुझे ऐसे नहीं आना था मैं कल आऊँगी। मैंने कहा, तुम एक काम करो फ़ोन काटो, अपने मोबाइल से मिस्ड कॉल दो और मैं कॉल करता हूँ। उसने ऐसा ही किया।

मैंने फ़ोन किया पर उससे बातें करने में बैलेंस खत्म हो गया, तो उसने फ़ोन किया और बोली, कल मैं पक्का आऊँगी।

अगले दिन मैंने सुबह घर की सफाई की, सब व्यवस्थित किया और वह ठीक तीन बजे आ गयी। मैंने उसको चाय पिलाई और मैं उसके काफी करीब बैठ गया।

मैंने उसको आई लव यू बोला, वह चुप थी। फिर वह बोली तुम मेरे बारे में जानते हो, ये मैं नहीं कर सकती।

मैंने उसको लुभाना (सिड्यूस) करना शुरू किया। उसकी हर बात को मैं अपने तरीके से बोल रहा था ताकि वह मन जाए।

बातों में मैंने उसका हाथ पकड़ लिया, मैंने उसको दोबारा आई लव यू बोला और जल्दी से चूम लिया। वह हाथ छिटक कर दूर हो गयी बोली, ये गलत है।

मैंने कहा आई लव यू, वह जो भी बोलती मैं जवाब में आई लव यू बोलता।

अंत में उसने भी आई लव यू बोल दिया। बस फिर क्या था, अगले ही पल हम दोनों एक दूसरे की बाँहो में लिपट गये थे।

मैंने उसको कस कर पकड़ रखा था। मैं उसके जिस्म को महसूस कर रहा था। थोड़ी देर में जब हम अलग हुए वह बोली, जानू अब जाती हूँ, भैया आने वाले है।

उसने कहा रात में बात करेंगे। मैंने कहा, रात में बातें करते है या वह करते है?

कहानी जारी रहेगी .. .. ..

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