अकेलेपन की शिकार भाभी की ताबड़तोड़ चुदाई-2

Akelepan ki shikar bhabhi ki tabadtod chudai-2

तो उसने पूछा- बस मिलने आये हो या कुछ करोगे भी?
मैंने कहा- अब तो आप मेरी प्रेमिका हो. और इस वक्त मेरी बांहों में हो करने को तो बहुत कुछ है अगर आपकी इजाज़त हो तो?

मेरी इस बात पर वह मेरी गोद में अपने दोनों पैर क्रॉस करके मेरे ऊपर बैठ गई और मेरे होंठों पर अपने होंठों से हाँ की मुहर लगा दी.
सीमा की इस हरकत पर मेरी भी चुदास भड़क उठी.

फिर क्या था … हम दोनों ही पागलों की तरह एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे. उसके होंठ इतने रस भरे रसीले और स्वादिष्ट थे कि क्या बताऊँ!
एक बार तो मैंने हल्के से उसके निचले होंठ को भी काट लिया था. जिस पर वो कसमसा गई और जोर से मुझे पकड़ लिया और भरपूर तरह से किस करने लगी।

लगातार 20 मिनट के ताबड़तोड़ चुम्मा-चाटी के बाद माहौल काफी गर्मा गया था और हम दोनों की सांस बहुत तेज़ तेज़ चल रही थी. हमारी आंखें भी नशे में लाल हो गई थी लेकिन मन तो तब भी नहीं भरा था.

और फिर धीरे धीरे मेरे लन्ड की ओर अपना हाथ बढ़ाने लगी और सहलाने लगी.

मेरा भी लन्ड तुंरत जीन्स के अंदर खड़ा होने लगा और मैंने उसे फिर से चूमना शुरू किया. इस बार मैं उसके स्तनों को भी भी ताबड़तोड़ मसलने लगा जिससे उसकी चीख निकल गई और वह सिसकारियां लेने लगी- आह … आह … अभिमन्यु … थोड़ा और ज़ोर से दबाओ. मसल डालो इन्हें आह … आह … बहुत परेशान करते हैं ये मुझे … उम्म … आह … और ज़ोर से दबाओ. निचोड़ डालो इन मादरचोद चूचों को.. आह.. उम्म.. आह…

फ़िर मैं एक हाथ उसकी नाईटी के नीचे से डाल कर उसकी गांड सहलाने लगा और हाथ उसकी पेंटी के अंदर डाल कर उसकी गांड सहलाने और मसलने लगा।
उफ्फ … उसकी गांड मसलने का अनुभव शब्दों में बता पाना मुश्किल है। क्या गज़ब की गांड थी उसकी! मेरे मज़बूत हाथों द्वारा उसकी गांड मसलने पर वह भी चरमरा गई थी और मुझे ‘उम्म … और ज़ोर से मसलो! बोल रही थी।

हम दोनों ही चुदाई की कामाग्नि में जल रहे थे.

फिर मैंने उसे वहीं गोद में उठाया और सोफे पर पटक दिया जिससे उसकी नाइटी जो पहले से ही घुटनों तक थी और भी ऊपर हो गई. मुझे उसकी लाल रंग की सैक्सी पैंटी के दर्शन होने लगे जिसमें से उसकी फूली हुई चूत नज़र रही थी.

अब मेरा खुद पर काबू कर पाना बहुत ही मुश्किल था. वह भी अपनी चूत को सहलाने लगी जो मेरे लिए एक साफ साफ इशारा था कि ‘आ और चोद डाल मुझे!’

बस फिर क्या था कामाग्नि और नशे में चूर मैं भी उस रंडी पर चढ़ बैठा. उसकी मोटी और गदराई हुई जांघों को मसलते हुए उसकी पैंटी को उतारा और सीधे उसकी चूत पर टूट पड़ा और बेतहाशा पागलों की तरह उसकी चूत को चूमने चाटने मसलने लगा.

मेरी इस हरकत से, मारे उत्तेजना के वह तड़पने और छटपटाने लगी।

फिर जैसे ही मेरी जीभ सीमा की चूत की दोनों फांकों के बीच में से रगड़ खाती हुई उसकी चूत के छेद पर लगी तो सीमा के मुँह से मस्ती से भरी हुई सिसकारियां निकलने लगीं- अहह बहुत मज़ा आ रहा है अभिमन्यु … उम्म्ह… अहह… हय… याह… ह्ह्ह…

सीमा की कामुक सिसकारियां सुन कर मैं और भी जोश में आ गया और सीमा की चूत के फांकों को फैला फैला कर उसकी चूत के छेद को अपनी जीभ से चाटने लगा. सीमा के बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई, उसका बदन कांपने लगा.

थोड़ी ही देर में सीमा की चुत बहने लगी, पर मैं लगातार चूत चुसाई करता रहा, वो अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को अपनी चुत पर दबाने लगी. सीमा अपने दोनों हाथों की उंगलियों को मेरे बालों में घुमाते हुए सिसकारी भरी- ओह्ह सीईईई अभिमन्यु … बसस्स ओर्रर बर्दाश्त नहीं हो रहा, तुम जल्दी से पेल दो ओह्ह्ह!

मुझे सीमा को ज्यादा तड़पाना ठीक नहीं लगा, उसकी चूत पर से अपना मुँह हटा लिया और सीधा होकर घुटनों के बल बैठ गया. फिर मैंने सीमा की टांगों को घुटनों से मोड़ कर ऊपर उठाते हुए दोनों तरफ फैला दिए जिससे उसकी चूत की फांकें फ़ैल गईं.

मैंने अपने लंड के सुपारे को सीमा की चूत पर लगा दिया. जैसे ही मेरे लंड का सुपारा उसकी गरम चूत के छेद पर लगा, उसके बदन ने एक झटका खाया और उसके मुँह से मस्ती भरी सिसकारियां छूटने लगीं- उम्ह्ह्ह अभिमन्यु पेल दो अपने लंड को … अहह देखो ना मेरी चूत कैसी अपना रस बहा रही है.

सीमा की चूत उसके कामरस से एकदम भीगी हुई थी इसलिए जैसे ही मैंने हल्का सा झटका दिया, मेरे लंड का सुपारा सरकता हुआ उसकी चूत के छेद में समा गया और उसकी जोर से सिसकारी निकल गई- सीईईई … ह्म्म्म … बहुत सख्त है.

मैंने बिना कोई देर किए एक और झटका मारा, मेरा आधा लंड सीमा की चूत में समा गया और सीमा के मुँह से एक और दबी हुई आहह निकल गयी- ओह्ह अभिमन्यु … धीरे से … तुम्हारा बहुत सख्त है उईईई.

मैं उसके ऊपर झुक गया, उसके तने हुए एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा. सीमा ने भी अपनी बांहों को मेरी पीठ पर कस लिया. वो मेरे सिर को अपनी छाती पर दबाने लगी और मैंने भी सीमा के निप्पल को चूसते हुए एक और जोरदार धक्का मार कर अपना पूरा का पूरा लंड सीमा की चूत की गहराई में उतार दिया.

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“ओह्हहह ऊऊऊ … अहहहाआ … अभिमन्यु … मर गई.” सीमा की जोर से चीख़ निकल गई.

पर उसकी ओर मैंने ध्यान ना देते हुए जोर जोर से अपनी कमर चलाकर अपना लंड सीमा की चुत में उतारने निकालने लगा.

सीमा कांपती हुई आवाज़ में कराहने लगी- अहह अभिमन्यु … आराम सेईई … ओह्ह धीरे धीरे करो ना … ओह सीईईई!

उधर अपने सामने इतनी हॉट माल को मुझसे इस तरह चुदता देख मुझे यह सब एक सपने जैसा लग रहा था जिससे मैं कभी जागना नहीं चाहता था।

अब मैं अपने लंड को धीरे धीरे सीमा की चूत के अन्दर बाहर करने लगा, उसको भी मज़ा आ रहा था, वो प्यार से मेरी पीठ पर हाथ फेर रही थी. मेरे लंड का सुपारा सीमा की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ आराम से अन्दर बाहर हो रहा था. उधर नीचे से सीमा भी अपनी गांड ऊपर की ओर उछाल कर मेरा साथ देने लगी थी।

एकदम मस्ती से भरी आवाज़ में सीमा ने कहा- ओह्ह्ह अभिमन्यु, मेरी चूत आहह ओह्ह्ह … पानी छोड़ने वाली है. तेज़ी सेईईई अभिमन्यु … जोर से जोर से चोदो ना! उईईई!

सीमा की बातें सुनकर मैं और जोश में आ गया और अपनी कमर को पूरी तेज़ी से हिलाते हुए अपने लंड को सीमा की चूत के अन्दर बाहर करते हुए चोदने लगा. कुछ ही पलों में सीमा का बदन अकड़ गया और उसकी चूत ने पानी छोड़ना चालू कर दिया.

जैसे ही सीमा का झड़ना बंद हुआ, उसने अपने बदन को ढीला छोड़ दिया। मैं भी ज़्यादा देर ना टिक पाया और आखिर दो तीन जोरदार धक्कों के साथ उसके ऊपर ढेर हो गया.

मैं सीमा की चूत में अपने वीर्य की बौछार करने लगा, कुछ देर बाद मैं सीमा के ऊपर से उठा और अपने कपड़े पहन लिए. सीमा ने भी लेटे लेटे अपनी नाइटी पहन ली।

मैंने सीमा की ओर देखते हुए पूछा- क्यों कैसा रहा?
तो उसने कहा- मुझे बहुत मज़ा आया.
यह सुनकर मैं जोर से हंसा और सीमा के चूतड़ों पर किस करने लगा.

और उसने मुझे अपने ऊपर खींच कर अपनी बांहों में भींच कर फिर से प्यार करने लगी और आई लव यू बोला।
यह सुन कर मुझे भी बहुत अच्छा लगा।

इसके बाद क्या हुआ फिर कभी बताऊँगा कि कैसे मैंने उसकी गांड मारी।
आपको मेरा अब तक का अनुभव कैसा लगा मुझे बतायें। मुझे आपके मेल का इंतज़ार रहेगा।

HotSexStory.xyz में कहानी पढ़ने के लिये आपका धन्यवाद, हमारी कोशिश है की हम आपको बेहतर कंटेंट देते रहे!

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