अपने ही सगे बेटे के साथ माँ की सेक्स – देसी कहानी

अर्चना की उम्र 38 साल की है। उसके पति ने उसे  12 साल पहले तलाक दे दिया था। तब उसके  पास 8 साल का मेरा बेटा राजीव था। अर्चना का  एक मात्र सहारा बेटा ही है। अब अर्चना का  बेटा राजीव 20 साल का हो गया है। वो काफी जवान और खुबसूरत है। अर्चना भी अभी तक काफी खुबसूरत और जवान दिखती थी।राजीव को एक दूकान में नौकरी लग गयी थी। घर का खर्च वही चलाता था। अर्चना अपने बेटे के अधीन रहती थी। एक दिन राजीव को गोवा के एक होटल में नौकरी का अच्छा ऑफर आया।  वो ठुकरा नहीं सका। उसने गोवा के होटल में वो नौकरी शीघ्र ही ज्वाइन कर ली। उसे रहने के लिए समुन्द्र के किनारे सुनसान जगह पर एक कमरे का मकान भी मिल गया।

गोवा के तटों पर हजारों सैलानी अर्ध नंगे हो कर घुमा करते थे। राजीव जिस होटल में काम करता था वहाँ के कमरे में अधिकाँश विदेशी रुकते थे। वदेशी महिला एकदम कम कपडे पहना करती थी। ये सब देख कर राजीव का मन सेक्स के लिए उतावला रहने लगा था। वो किसी भी सूरत में सेक्स करना चाहता था लेकिन पकडे जाने के डर से वो सेक्स नहीं कर पा रहा था। अचानक उसे अपनी माँ का ख्याल आया और सोचा कि इस अनजान जगह में अपनी माँ को बुला कर अगर किसी तरह सेक्स किया जाय तो किसे पता चलेगा? वो गाँव वापस गया। वहाँ उसकी माँ को कहा कि माँ  अब वहाँ  भी अकेले मन नहीं लगता है। मैं तुझे लेने आया हूँ। अर्चना बड़ी ख़ुशी ख़ुशी उसके साथ गोवा चलने के लिए तैयार हो गयी।

राजीव ने कम्बल को खुद और अपनी माँ को पूरी तरह से सर के ऊपर से ढंकते हुए अपनी माँ से चिपट गया। ताकि माँ का शरीर कम्बल से बाहर ना निकले। उसने अपनी माँ को अपने से सटाते हुए कहा – माँ, ठीक से कम्बल ओढ़ लो नहीं तो ठण्ड लग जायेगी।अर्चना ने भी अपने शरीर को अपने बेटे से सटा दिया और कम्बल में पूरी तरह घुस गयी।इसी क्रम में उसकी चूची उसके बेटे के सीने में चिपक रही थी। राजीव ने अपनी माँ की चूची को अपने सीने से दबा दबा कर मजे ले रहा था। उसकी माँ की साँसे गरम हो रही थी। राजीव ने अपने हाथों को अपनी माँ के पीछे ले जा कर माँ को लपेट लिए और मजबूती से अपनी तरफ खींचने लगा।

राजीव ने अर्चना से कहा – माँ, मैं एक बात तो तुझे बताना ही भूल गया।
अर्चना – कौन सी बात।
राजीव – मैंने इस होटल वाले को तुम्हे अपनी पत्नी बताया तब जा कर सिंगल रूम मिल सका।
अर्चना – लेकिन तूने ऐसा क्यों किया?
राजीव – ऐसा नहीं करता तो आज कहीं भी कमरा मिलना मुश्किल हो जाता।। क्यों कि आज कोई परीक्षा है और चारों तरफ स्टूडेंट की भीड़ है। वो तो हमारा भाग्य अच्छा था जो हमें ये कमरा मिल गया।

अर्चना – लेकिन मैं इतनी जवान थोड़े ही ना हूँ जो तेरी बीबी दिखूंगी?

राजीव – अरे , तू अभी भी एक दम जवान दिखती है।
अर्चना – चल हट पगले।।
राजीव ने अपने हाथों को अपनी माँ के पीठ पर और अधिक दबाते हुए अपनी माँ को अपने से सटाया और अपनी माँ की चूची पर दवाब बढाते हुए कहा – तू अपनी खूबसूरती के बारे में नहीं जानती।
राजीव ने कहा – माँ, तू अपने ब्लाउज खोल दे ना।।तेरे ब्लाउज का बटन मेरे सीने में चुभ रहा है।
अर्चना – बेटा , मैंने अन्दर कुछ नहीं पहना है।
राजीव ने अपनी माँ का ब्लाउज का सामने का बटन खुद ही खोलते हुए कहा – माँ, गोवा में लगभग हर लड़की बिना कपडे के ही समन्दर में नहाती रहती है। मैंने कई लड़कियों को बिना कपडे के देखा है। मुझ पर कोई असर नहीं होने वाला।। तू आराम से अपने ब्लाउज को खोल ले। तुझे भी आराम मिलेगा। वैसे भी मुझसे क्या शर्माना।।? आज तो मैं तेरा हसबैंड हूँ।।
कहते हुए उसने अपनी माँ का ब्लाउज खोल दिया और माँ की चूची पर से हटा दिया।
अर्चना ने अपने आप को थोडा अलग किया और अपना ब्लाउज को पूरी तरह खोल दिया। अब वो ऊपर से पूरी नंगी थी। राजीव ने उसे फिर से अपने आप से सटा लिया। अर्चना ने अपने हाथों को अपने स्तन और राजीव के  सीने के बीच लगा रखा था।।लेकिन राजीव ने अपनी माँ के हाथ को जबरदस्ती हटाया और अर्चना के चूची को दबाने लगा।

वो कहा –  तेरी चूची एकदम विदेशी लड़की की तरह सख्त है। इसलिए किसी को पता ही नहीं चलता कि तू मेरी बीबी नहीं है।

अब राजीव का एक हाथ अर्चना के जाघों पर था । उसने अपनी माँ के साडी को अर्चना के कमर तक उठा दिया और उसके नंगे चुतद पर हाथ फिराने लगा। इसी क्रम में उसका लंड पूरी तरह खडा हो गया।
धीरे धीरे उसने अर्चना के चूत पर हाथ घसने लगा। घसते  घसते उसने अर्चना के चूत के छेद में अपनी ऊँगली डाल दिया।
अर्चना – बेटा , तू ये क्या कर रहा है? मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है।
राजीव – देख मेरी रानी, इस होटल में हमें कोई नहीं जानता कि हम दोनों एक दुसरे के क्या लगते हैं? अगर हम दोनों थोडा मजे कर ही लें तो किसी को क्या दिक्कत होगी? और तू कोई कुंवारी लड़की तो है नहीं की, तेरा कुंवारापन ख़त्म हो जाएगा? और तुझे बापू ने भी छोड़ दिया है।।तुझे भी तो मन करता होगा ये सब करने का?
अर्चना – मन तो करता है लेकिन तू मेरा बेटा हैं ना। राजीव – जब एक बिस्तर पर एक जवान नर और एक जवान मादा एक कम्बल में लगभग नंगे हो तो उनमे कोई रिश्ता नहीं रहता।।
अर्चना तो पूरी तरह से राजीव पर आश्रित थी ही। उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं रहता था।
राजीव – मैंने तो ये फैसला किया है कि तुझे गोवा में भी अपनी बीबी बना कर रखूँगा। वहाँ किसे पता चलेगा?
अर्चना – क्या सच में?

राजीव – हाँ अर्चना  ।।। अब देख ना , अगर तू मेरी पत्नी बन कर गोवा में रहेगी तो मैं तुझे माँ कह कर तो नहीं बुला सकूँगा। तुझे अर्चना कह के बुलाऊंगा। तुझे बुरा तो नहीं लगेगा ना?

अर्चना – नहीं तू मुझे किसी भी नाम से बुलाएगा मुझे बुरा नहीं लगेगा।

राजीव – तो ठीक है तू अभी से ही मेरी पत्नी हुई। अब से ही मैं तुझे कामनी कह के बुलाता हूँ ताकि गोवा पहुँचते पहुँचते मुझे तुम्हे अर्चना कहने की आदत हो जाय।

अर्चना – ठीक है। बेटा

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राजीव – देख अर्चना ।।तू भी मुझे बेटा मत कहो। सिर्फ राजीव कहो। वो भी अभी से ही।

अर्चना – ठीक है राजीव।

राजीव ने ख़ुशी से अर्चना के चूत में ऊँगली अन्दर बाहर करते हुए कहा – ये हुई ना बात अर्चना। अब से तू मेरी बीबी और मैं तेरा पतिदेव बन के रहेंगे। तुझमे अभी बहुत जवानी बांकी है।तेरी जवानी और खूबसूरती को बेकारनहीं जाने दूंगा।  अर्चना, तू मेरी बीबी तो बन गयी लेकिन बीबी वाला काम नहीं कर रही है तू।

अर्चना – राजीव अब तो तू मुझे बीबी मान चूका है तो जो करना है कर ले। राजीव उसके चूत को पनियाते हुए  कहा- अर्चना, तेरी चूत तो बड़ी मस्त है रे।

राजीव ने अपना अंडरवियर भी  खोल दिया और नंगा  हो गया। राजीव का लंड अपनी माँ के खुबसूरत बदन को देख कर दोहरा हुए जा रहा था। वो अर्चना के बदन पर चढ़ गया और उसके होठ को चूसने लगा। अर्चना ने कोई प्रतिरोध नहीं किया। राजीव एक हाथ से अपनी माँ की चूची को दबा रहा था। फिर वो अर्चना की पूरी साड़ी और पेटीकोट को  खोल दिया। अब अर्चना पूरी तरह नंगी हो चुकी थी। उसके चूत को उसका बेटा सहला रहा था। अर्चना को ये सब पूरी तरह से अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन वो मजबूर  थी। वो मजबूर हो कर अपना शरीर अपने बेटे के हवाले कर चुकी थी।।अब राजीव को जो मर्जी हो उसके साथ कर सकता था। राजीव ने अपनी माँ के पैरो को फैलाया और चूत को सहलाते हुए कहा – अर्चना , तू कब से नहीं चुदवाई है?

अर्चना – जब से तेरा बापू मुझे छोड़ कर गया है तब से।।

राजीव – यानि पिछले बारह साल से तूने किसी से नहीं चुदवाया है?

अर्चना – नहीं जी, तब से मैं भी प्यासी हूँ।

राजीव – आज तेरी बरसों की प्यास बुझा देता हूँ।

अर्चना की चूत ना चाहते हुए भी गीली हो चुकी थी।

राजीव ने अपने लंड को अर्चना के चूत में डाल दिया। अर्चना की आँख में लाज के मारे आंसू निकल गए।। लेकिन राजीव को उसके आंसू नहीं बल्कि उसकी चूत दिख रही थी।राजीव ने अपनी माँ को जी भर कर रात भर जबरदस्ती चोदा। बेचारी अर्चना एक बार उफ्फ तक नहीं की।सुबह होते होते अर्चना भी अपने आप को राजीव के प्रति पूरी तरह मन से पति मान चुकी थी। जब वो दोनों गोवा की ट्रेन में बैठे तो किसी को भी अंदाजा नहीं था कि ये दोनों पति पत्नी नहीं थे।गोवा में भी दोनों पति पत्नी बन कर ही रहने लगे। 2 महीने में अर्चना तो भूल ही चुकी थी कि राजीव उसका सगा बेटा है। वो राजीव को ही अपना पति मान ली। उसके लम्बे आयु के लिए अर्चना ने करवा चौथ का व्रत करना भी शुरू कर दिया।एक साल बाद ही अर्चना राजीव के बच्चे की माँ भी बन चुकी थी।कैसी लगी हम डॉनो माँ बेटे की सेक्स स्टोरी , अच्छा लगी तो शेयर करना , अगर कोई मेरी माँ की चूत की चुदाई करना चाहते हैं तो उसे अब ऐड करो Chudai ki bhukhi sexy mummy.

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